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श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी
भूले-बिसरे पल
माँ हीराबेन मोदी के साथ नन्हा मोदी
महामाता हीरा बेन की आँखों का तारा।अब जन जन का प्यारा मोदी।।
किस विचार में खोया है,भारत माता का पूत ?
यही वह पवित्र कार्यशाला जहाँ पर अपना मोदी तपिस में तप कर फौलाद बना .
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गुरु गृह पढ़न गए रघुराई . अल्प काल विद्या सब पाई .
झुग्गी से निकलकर राजनीति के आसमान का सूर्य बना .
आज उनलोगों को चाय पिला रहा है, कल जिनका प्रधान बनेगा ,
सेवकाई सीखी जाकरके,उस जगह जहाँ सेवक गढ़ है।
कर्मवीर की थाली में, है व्यंजन माँ के हाथों का।
जहाँ पर दुनिया की सोचने की शक्ति ख़तम हो जाती है, इस बन्दे की वहीं से शुरू-------
आज भारत की अस्मिता तुम्हारे कंधे पर ------------
वाणी से तेरी मंत्रमुग्ध है,दुनिया सारी अम्बर सारा।
उठाली हाँथ में झाड़ू,गन्दगी जब बढ़ी जग में।
माँ के हाथों से तिलक लगा, विश्वविजय को निकल पड़ा।
हे ! माँ तेरे हाथों से खाने को तरस गया !
माँ ने महामंत्र तब दीन्हा। प्रेम सहित कर में राखी लीन्हा।।
महागुरु, महामाता से गुरुज्ञान प्राप्त करते हुए।
दुनियाँ की सबसे बड़ी सौभाग्यशाली माँ, दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र के प्रधान की क्षुधा तृप्त करते हुए।
भारत के भाग्य-सूर्य का उदय !
भारत का शूर वीर !
चलो उस पार चलो,चाँद के पार चलो !
ये बंधन तो, प्यार का बंधन है -----
यारा तेरी यारी को मैंने तो खुदा माना ----
ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे ------
मेरी जिंदगी सवाँरी मुझको गले लगा के ----
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